संस्कृति और विरासत
संस्कृति
रामगढ़ की संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है, जो इसे विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। यह जिला आदिवासी परंपराओं, हिंदू रीति-रिवाजों तथा आधुनिक प्रभावों के सुंदर और सामंजस्यपूर्ण मेल को प्रदर्शित करता है।
दो प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल हैं:
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छिन्नमस्ता मंदिर – यह एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है तथा विवाह समारोहों और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत लोकप्रिय स्थान है।
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टूटी झरना मंदिर – यह एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, जहाँ प्रायः विवाह समारोह संपन्न किए जाते हैं।
मेले और त्योहार
रामगढ़ अपने बहुसांस्कृतिक स्वरूप को दर्शाते हुए अनेक प्रकार के त्योहार उत्साहपूर्वक मनाता है। प्रमुख त्योहार निम्नलिखित हैं:
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दीपावली
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होली
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छठ
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दुर्गा पूजा / नवरात्रि (दशहरा)
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राम नवमी
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करमा
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सरहुल
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टुसू
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ईद
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सरस्वती पूजा
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मकर संक्रांति
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जीवित्पुत्रिका (जितिया)
विशेष रूप से विश्वकर्मा पूजा यहाँ की औद्योगिक और खनन गतिविधियों के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
छिन्नमस्ता मंदिर में आयोजित मकर संक्रांति मेला प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। करमा और टुसू जैसे त्योहारों के अवसर पर भी मेलों का आयोजन किया जाता है।
खान-पान
रामगढ़ में पारंपरिक भोजन और व्यंजनों की व्यापक विविधता देखने को मिलती है। घरों में सामान्यतः बनाए जाने वाले प्रमुख खाद्य पदार्थ हैं:
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रोटी (चपाती/फुल्का)
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चावल (भात)
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दाल
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सब्जी
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अचार
स्थानीय व्यंजनों में प्रमुख हैं:
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दुसका – मुख्य रूप से चावल और उड़द दाल के घोल से बनाया जाने वाला स्वादिष्ट नमकीन व्यंजन।
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वड़ा – मुख्यतः उड़द दाल से तैयार किया जाने वाला व्यंजन।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न प्रकार की वन उपज और मौसमी सब्जियाँ भी प्रचलित हैं, जैसे:
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बांस की कोपलों के पकोड़े
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कद्दू के फूलों के पकोड़े
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खुखरी (जंगली मशरूम) की सब्जी