माँ पंचबहिनी मंदिर, श्रेणी- D
माँ पंचबहिनी मंदिर, रामगढ़ के पतरातू प्रखंड के लबगा गांव में स्थित है और इसका इतिहास लगभग पांच दशक पुराना है। यह मंदिर 1965 में विधि-विधान से स्थापित किया गया था और तब से यहां श्रद्धालुओं की आस्था की अनुभूति होती रही है। यह मंदिर विशेष रूप से विवाह कराने के लिए प्रसिद्ध है, जहां झारखंड के अलावा बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश से भी हजारों जोड़े हर साल विवाह के लिए आते हैं। यहां विवाह करने से वैवाहिक जीवन सुखमय और समृद्ध होता है, इसलिए यह सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल बन चुका है।
मंदिर में माँ पंचबहिनी के साथ देवी शीतला, भगवान भोलेनाथ, माता पार्वती, भगवान गणेश, शेषनाथ, कार्तिकेय और पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। मंदिर प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ है और इसके पीछे पतरातू डैम का एक विहंगम दृश्य है, जबकि सामने कल-कल बहता जलमय फाटक एक संगीत जैसे माहौल का सृजन करता है। यह मंदिर फोरलेन मार्ग के बगल में स्थित है, इसलिए आने-जाने में भी आसानी होती है।
पर्यटन की दृष्टि से मंदिर में बुनियादी सुविधाओं की कमी है जैसे शौचालय, विवाह भवन, स्नानागार। यहां सालाना लगभग 400 से अधिक विवाह समारोह संपन्न होते हैं, इस वजह से श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रहती है। मंदिर परिसर से जुड़े लगभग 100 परिवार सीधे और 500 से अधिक अप्रत्यक्ष रूप से इस से जुड़े कार्यों से आजीविका प्राप्त करते हैं जैसे पंडिताई, प्रसाद वितरण, फोटोग्राफी, फूल-माला, चाय-नाश्ता आदि।
माँ पंचबहिनी मंदिर तक पहुंचना आसान है क्योंकि यह पतरातू डैम के नजदीक है। रामगढ़ जिले में स्थित इसे सड़क मार्ग से टैक्सी, ऑटो या निजी वाहन से पहुंचा जा सकता है। मंदिर के आसपास प्राकृतिक सौंदर्य, पतरातू डैम, लेक रिसॉर्ट और नेतुआ टापू जैसे पर्यटन स्थल भी हैं, जो पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करते हैं.
इस मंदिर का धार्मिक, सामाजिक और पर्यटन महत्व अत्यंत बलवान है। भविष्य में बेहतर बुनियादी सुविधाओं जैसे शौचालय, विवाह भवन, बनाने से यह क्षेत्र और भी अधिक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। इसके साथ ही, धार्मिक उत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने से स्थानीय समुदाय की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी.
संक्षेप में, माँ पंचबहिनी मंदिर रामगढ़ जिले के धार्मिक और सामाजिक जीवन का एक प्रमुख केंद्र है, जो आस्था, परंपरा और संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। यह स्थल अपनी श्रद्धा, विवाह की परंपरा और प्राकृतिक सुंदरता के कारण आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आकर्षक और महत्वपूर्ण है।
फोटो गैलरी
कैसे पहुंचें
बाय एयर
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट (रांची) से माँ पंचवाहिनी मंदिर (जो रामगढ़ जिले के लाबगा में खूबसूरत पतरातू डैम के पास स्थित है) की दूरी 44.7 किलोमीटर है।
एयरपोर्ट से बाहर निकलें और निजी कार/कैब (सबसे सुविधाजनक), दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटर) या लोकल बस लें।
इस रूट पर यात्रा का मुख्य साधन सड़क मार्ग है।
ट्रेन द्वारा
रामगढ़ कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशन (RMT) से लाबगा, पतरातू स्थित माँ पंचवाहिनी मंदिर की दूरी लगभग 28 किलोमीटर है।
रेलवे स्टेशन से बाहर निकलें और निजी कार/कैब (सबसे सुविधाजनक), दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटर) या लोकल बस लें।
इस रूट पर यात्रा का मुख्य साधन सड़क मार्ग है।
सड़क के द्वारा
रामगढ़ बस स्टैंड से लाबगा, पतरातू स्थित माँ पंचवाहिनी मंदिर की दूरी 27.4 किलोमीटर है।
यात्रा के साधन और रूट की जानकारी: यह मंदिर पतरातू डैम के मुख्य गेट के पास फोर-लेन सड़क के ठीक बगल में स्थित है। इसलिए यहाँ इन साधनों से आसानी से पहुँचा जा सकता है:
निजी कार/कैब (सबसे सुविधाजनक), दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटर) या लोकल बस।
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट (रांची) से माँ पंचवाहिनी मंदिर (जो रामगढ़ जिले के लाबगा में खूबसूरत पतरातू डैम के पास स्थित है) की दूरी 44.7 किलोमीटर है।
एयरपोर्ट से बाहर निकलें और निजी कार/कैब (सबसे सुविधाजनक), दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटर) या लोकल बस लें।
इस रूट पर यात्रा का मुख्य साधन सड़क मार्ग है।
रामगढ़ कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशन (RMT) से लाबगा, पतरातू स्थित माँ पंचवाहिनी मंदिर की दूरी लगभग 28 किलोमीटर है।
रेलवे स्टेशन से बाहर निकलें और निजी कार/कैब (सबसे सुविधाजनक), दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटर) या लोकल बस लें।
इस रूट पर यात्रा का मुख्य साधन सड़क मार्ग है।
रामगढ़ बस स्टैंड से लाबगा, पतरातू स्थित माँ पंचवाहिनी मंदिर की दूरी 27.4 किलोमीटर है।
यात्रा के साधन और रूट की जानकारी: यह मंदिर पतरातू डैम के मुख्य गेट के पास फोर-लेन सड़क के ठीक बगल में स्थित है। इसलिए यहाँ इन साधनों से आसानी से पहुँचा जा सकता है:
निजी कार/कैब (सबसे सुविधाजनक), दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटर) या लोकल बस।